पंचांग 31 अक्टूबर 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
31 अक्टूबर 2029 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:02
चंद्रोदय01:25 (1 नव॰)
चंद्रास्त13:28
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- कर्क 23:37 तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 04:02 (1 नव॰) तक, फिर कृष्ण दशमी 02:22 (2 नव॰) तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा 23:37 तक, फिर मघा 22:47 (1 नव॰) तक
- योग
- शुभ 10:54 तक, फिर शुक्ल 08:54 (1 नव॰) तक
- करण
- तैतिल 16:35 तक, फिर गर 04:02 (1 नव॰) तक, फिर वणिज 15:18 (1 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:40परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:18 – 13:44
- यमगंड07:59 – 09:25
- गुलिक काल10:52 – 12:18
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:33 – 07:59
- अमृत(शुभ)07:59 – 09:25
- काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:52
- शुभ(शुभ)10:52 – 12:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:44
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:44 – 15:10
- चर(सामान्य)15:10 – 16:36
- लाभ(शुभ)16:36 – 18:02
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:02 – 19:36
- शुभ(शुभ)19:36 – 21:10
- अमृत(शुभ)21:10 – 22:44
- चर(सामान्य)22:44 – 00:18 (1 नव॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:18 (1 नव॰) – 01:52 (1 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:52 (1 नव॰) – 03:26 (1 नव॰)
- लाभ(शुभ)03:26 (1 नव॰) – 05:00 (1 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:00 (1 नव॰) – 06:34 (1 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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