पंचांग 14 अक्टूबर 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
14 अक्टूबर 2029 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:28
सूर्यास्त18:12
चंद्रोदय12:53
चंद्रास्त00:22 (15 अक्टू॰)
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- धनु 21:53 तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल अष्टमी 04:29 (15 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल नवमी 04:38 (16 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 15:49 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 16:17 (15 अक्टू॰) तक
- योग
- अतिगण्ड 09:32 तक, फिर सुकर्मा 08:06 (15 अक्टू॰) तक
- करण
- विष्टि 16:38 तक, फिर बव 04:29 (15 अक्टू॰) तक, फिर बालव 16:29 (15 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:43
- राहु काल16:44 – 18:12
- यमगंड12:20 – 13:48
- गुलिक काल15:16 – 16:44
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:28 – 07:56
- चर(सामान्य)07:56 – 09:24
- लाभ(शुभ)09:24 – 10:52
- अमृत(शुभ)10:52 – 12:20
- काल(वर्जित (परंपरा))12:20 – 13:48
- शुभ(शुभ)13:48 – 15:16
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:16 – 16:44
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:44 – 18:12
रात
- शुभ(शुभ)18:12 – 19:44
- अमृत(शुभ)19:44 – 21:16
- चर(सामान्य)21:16 – 22:48
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:48 – 00:20 (15 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:20 (15 अक्टू॰) – 01:52 (15 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)01:52 (15 अक्टू॰) – 03:24 (15 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (15 अक्टू॰) – 04:56 (15 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)04:56 (15 अक्टू॰) – 06:28 (15 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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