पंचांग 22 मार्च 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 मार्च 2029 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:37
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय11:12
चंद्रास्त00:51 (23 मार्च)
- मास:
- अधिक चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- वृषभ 20:33 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- शुक्ल सप्तमी 00:43 (23 मार्च) तक, फिर शुक्ल अष्टमी 01:11 (24 मार्च) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 07:43 तक, फिर मृगशीर्ष 09:14 (23 मार्च) तक
- योग
- आयुष्मान 00:05 (23 मार्च) तक, फिर सौभाग्य 23:22 (23 मार्च) तक
- करण
- गर 12:13 तक, फिर वणिज 00:43 (23 मार्च) तक, फिर विष्टि 13:03 (23 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:17 – 13:05
- राहु काल14:12 – 15:43
- यमगंड06:37 – 08:08
- गुलिक काल09:39 – 11:10
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:37 – 08:08
- रोग(वर्जित (परंपरा))08:08 – 09:39
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:39 – 11:10
- चर(सामान्य)11:10 – 12:41
- लाभ(शुभ)12:41 – 14:12
- अमृत(शुभ)14:12 – 15:43
- काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
- शुभ(शुभ)17:14 – 18:46
रात
- अमृत(शुभ)18:46 – 20:14
- चर(सामान्य)20:14 – 21:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:12
- काल(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:41 (23 मार्च)
- लाभ(शुभ)00:41 (23 मार्च) – 02:09 (23 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:09 (23 मार्च) – 03:38 (23 मार्च)
- शुभ(शुभ)03:38 (23 मार्च) – 05:07 (23 मार्च)
- अमृत(शुभ)05:07 (23 मार्च) – 06:36 (23 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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