पंचांग 21 फ़रवरी 2029

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 फ़रवरी 2029 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:58
सूर्यास्त18:37
चंद्रोदय11:38
चंद्रास्त01:13 (22 फ़र॰)
मास:
फाल्गुन (अमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 07:50 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 09:19 (22 फ़र॰) तक
नक्षत्र
कृत्तिका 22:35 तक, फिर रोहिणी 00:13 (23 फ़र॰) तक
योग
इन्द्र 18:13 तक, फिर वैधृति 18:03 (22 फ़र॰) तक
करण
वणिज 07:50 तक, फिर विष्टि 20:39 तक, फिर बव 09:19 (22 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:11परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:48 – 14:15
  • यमगंड08:26 – 09:53
  • गुलिक काल11:20 – 12:48

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:58 – 08:26
  • अमृत(शुभ)08:26 – 09:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:53 – 11:20
  • शुभ(शुभ)11:20 – 12:48
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:42
  • चर(सामान्य)15:42 – 17:10
  • लाभ(शुभ)17:10 – 18:37

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:37 – 20:10
  • शुभ(शुभ)20:10 – 21:42
  • अमृत(शुभ)21:42 – 23:15
  • चर(सामान्य)23:15 – 00:47 (22 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:47 (22 फ़र॰) – 02:20 (22 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:20 (22 फ़र॰) – 03:53 (22 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)03:53 (22 फ़र॰) – 05:25 (22 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:25 (22 फ़र॰) – 06:58 (22 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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