पंचांग 4 फ़रवरी 2029

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

4 फ़रवरी 2029 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:07
सूर्यास्त18:30
चंद्रोदय23:46
चंद्रास्त10:34
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
कन्या 12:08 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 18:22 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 16:15 (5 फ़र॰) तक
नक्षत्र
चित्रा 23:19 तक, फिर स्वाती 22:00 (5 फ़र॰) तक
योग
शूल 01:31 (5 फ़र॰) तक, फिर गण्ड 22:42 (5 फ़र॰) तक
करण
गर 07:36 तक, फिर वणिज 18:22 तक, फिर विष्टि 05:16 (5 फ़र॰) तक, फिर बव 16:15 (5 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल17:04 – 18:30
  • यमगंड12:48 – 14:13
  • गुलिक काल15:39 – 17:04

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:07 – 08:32
  • चर(सामान्य)08:32 – 09:57
  • लाभ(शुभ)09:57 – 11:23
  • अमृत(शुभ)11:23 – 12:48
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:13
  • शुभ(शुभ)14:13 – 15:39
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:39 – 17:04
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:04 – 18:30

रात

  • शुभ(शुभ)18:30 – 20:04
  • अमृत(शुभ)20:04 – 21:39
  • चर(सामान्य)21:39 – 23:13
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:13 – 00:48 (5 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:48 (5 फ़र॰) – 02:22 (5 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)02:22 (5 फ़र॰) – 03:57 (5 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:57 (5 फ़र॰) – 05:32 (5 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)05:32 (5 फ़र॰) – 07:06 (5 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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