पंचांग 3 जनवरी 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 जनवरी 2029 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:07
सूर्यास्त18:10
चंद्रोदय20:57
चंद्रास्त09:05
- मास:
- पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
- संवत्सर:
- कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- कर्क 01:18 (4 जन॰) तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 17:03 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 14:49 (4 जन॰) तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा 01:18 (4 जन॰) तक, फिर मघा 23:43 (4 जन॰) तक
- योग
- विष्कम्भ 15:38 तक, फिर प्रीति 12:37 (4 जन॰) तक
- करण
- विष्टि 17:03 तक, फिर बव 03:57 (4 जन॰) तक, फिर बालव 14:49 (4 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:17 – 13:01परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:39 – 14:02
- यमगंड08:30 – 09:53
- गुलिक काल11:16 – 12:39
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:07 – 08:30
- अमृत(शुभ)08:30 – 09:53
- काल(वर्जित (परंपरा))09:53 – 11:16
- शुभ(शुभ)11:16 – 12:39
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:02
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:02 – 15:24
- चर(सामान्य)15:24 – 16:47
- लाभ(शुभ)16:47 – 18:10
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:10 – 19:47
- शुभ(शुभ)19:47 – 21:25
- अमृत(शुभ)21:25 – 23:02
- चर(सामान्य)23:02 – 00:39 (4 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:39 (4 जन॰) – 02:16 (4 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:16 (4 जन॰) – 03:53 (4 जन॰)
- लाभ(शुभ)03:53 (4 जन॰) – 05:30 (4 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:30 (4 जन॰) – 07:07 (4 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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