पंचांग 27 दिसंबर 2028
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
27 दिसंबर 2028 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:04
सूर्यास्त18:06
चंद्रोदय14:22
चंद्रास्त03:48 (28 दिस॰)
- मास:
- पौष (अमांत)
- संवत:
- शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
- संवत्सर:
- कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल एकादशी 22:27 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 23:21 (28 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- भरणी 03:11 (28 दिस॰) तक, फिर कृत्तिका 04:29 (29 दिस॰) तक
- योग
- सिद्ध 04:49 (28 दिस॰) तक, फिर साध्य 04:13 (29 दिस॰) तक
- करण
- वणिज 09:46 तक, फिर विष्टि 22:27 तक, फिर बव 10:59 (28 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 12:57परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:35 – 13:58
- यमगंड08:27 – 09:50
- गुलिक काल11:13 – 12:35
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:04 – 08:27
- अमृत(शुभ)08:27 – 09:50
- काल(वर्जित (परंपरा))09:50 – 11:13
- शुभ(शुभ)11:13 – 12:35
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:35 – 13:58
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:58 – 15:21
- चर(सामान्य)15:21 – 16:43
- लाभ(शुभ)16:43 – 18:06
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:06 – 19:43
- शुभ(शुभ)19:43 – 21:21
- अमृत(शुभ)21:21 – 22:58
- चर(सामान्य)22:58 – 00:35 (28 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:35 (28 दिस॰) – 02:13 (28 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:13 (28 दिस॰) – 03:50 (28 दिस॰)
- लाभ(शुभ)03:50 (28 दिस॰) – 05:28 (28 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:28 (28 दिस॰) – 07:05 (28 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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