पंचांग 20 दिसंबर 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 दिसंबर 2028 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:01
सूर्यास्त18:02
चंद्रोदय10:13
चंद्रास्त22:01
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
मकर 22:28 तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 07:45 तक, फिर शुक्ल पंचमी 09:23 (21 दिस॰) तक
नक्षत्र
श्रवण 09:27 तक, फिर धनिष्ठा 11:36 (21 दिस॰) तक
योग
हर्षण 01:20 (21 दिस॰) तक, फिर वज्र 01:43 (22 दिस॰) तक
करण
विष्टि 07:45 तक, फिर बव 20:30 तक, फिर बालव 09:23 (21 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 12:54परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:32 – 13:54
  • यमगंड08:24 – 09:46
  • गुलिक काल11:09 – 12:32

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:01 – 08:24
  • अमृत(शुभ)08:24 – 09:46
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:46 – 11:09
  • शुभ(शुभ)11:09 – 12:32
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:32 – 13:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:54 – 15:17
  • चर(सामान्य)15:17 – 16:40
  • लाभ(शुभ)16:40 – 18:02

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:02 – 19:40
  • शुभ(शुभ)19:40 – 21:17
  • अमृत(शुभ)21:17 – 22:55
  • चर(सामान्य)22:55 – 00:32 (21 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:32 (21 दिस॰) – 02:09 (21 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:09 (21 दिस॰) – 03:47 (21 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)03:47 (21 दिस॰) – 05:24 (21 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:24 (21 दिस॰) – 07:02 (21 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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