पंचांग 27 अक्टूबर 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 अक्टूबर 2028 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:32
सूर्यास्त18:04
चंद्रोदय14:19
चंद्रास्त02:17 (28 अक्टू॰)
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल दशमी 03:47 (28 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल एकादशी 06:21 (29 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 19:29 तक, फिर शतभिषा 22:30 (28 अक्टू॰) तक
योग
गण्ड 12:29 तक, फिर वृद्धि 13:23 (28 अक्टू॰) तक
करण
तैतिल 14:32 तक, फिर गर 03:47 (28 अक्टू॰) तक, फिर वणिज 17:04 (28 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल10:51 – 12:18
  • यमगंड15:11 – 16:37
  • गुलिक काल07:58 – 09:25

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:32 – 07:58
  • लाभ(शुभ)07:58 – 09:25
  • अमृत(शुभ)09:25 – 10:51
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:18
  • शुभ(शुभ)12:18 – 13:44
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:44 – 15:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:11 – 16:37
  • चर(सामान्य)16:37 – 18:04

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:04 – 19:37
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:37 – 21:11
  • लाभ(शुभ)21:11 – 22:44
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:44 – 00:18 (28 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)00:18 (28 अक्टू॰) – 01:52 (28 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)01:52 (28 अक्टू॰) – 03:25 (28 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)03:25 (28 अक्टू॰) – 04:59 (28 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:59 (28 अक्टू॰) – 06:32 (28 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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