पंचांग 30 अगस्त 2028
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 अगस्त 2028 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय15:45
चंद्रास्त03:04 (31 अग॰)
- मास:
- भाद्रपद (अमांत)
- संवत:
- शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
- संवत्सर:
- कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- धनु 05:36 (31 अग॰) तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल एकादशी 20:47 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 22:31 (31 अग॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 23:03 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 01:24 (1 सित॰) तक
- योग
- आयुष्मान 22:33 तक, फिर सौभाग्य 22:57 (31 अग॰) तक
- करण
- वणिज 08:05 तक, फिर विष्टि 20:47 तक, फिर बव 09:36 (31 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:34 – 14:08
- यमगंड07:53 – 09:27
- गुलिक काल11:01 – 12:34
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:19 – 07:53
- अमृत(शुभ)07:53 – 09:27
- काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:01
- शुभ(शुभ)11:01 – 12:34
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:34 – 14:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:42
- चर(सामान्य)15:42 – 17:16
- लाभ(शुभ)17:16 – 18:50
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:50 – 20:16
- शुभ(शुभ)20:16 – 21:42
- अमृत(शुभ)21:42 – 23:08
- चर(सामान्य)23:08 – 00:35 (31 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:35 (31 अग॰) – 02:01 (31 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:01 (31 अग॰) – 03:27 (31 अग॰)
- लाभ(शुभ)03:27 (31 अग॰) – 04:53 (31 अग॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:53 (31 अग॰) – 06:19 (31 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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