पंचांग 9 जुलाई 2028
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
9 जुलाई 2028 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:04
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय21:08
चंद्रास्त08:07
- मास:
- आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
- संवत्सर:
- कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- मकर 04:21 (10 जुल॰) तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 04:18 (10 जुल॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 06:34 (11 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 15:02 तक, फिर धनिष्ठा 17:45 (10 जुल॰) तक
- योग
- विष्कम्भ 08:41 तक, फिर प्रीति 09:22 (10 जुल॰) तक
- करण
- वणिज 15:16 तक, फिर विष्टि 04:18 (10 जुल॰) तक, फिर बव 17:24 (10 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:06
- राहु काल17:36 – 19:15
- यमगंड12:39 – 14:18
- गुलिक काल15:57 – 17:36
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:04 – 07:43
- चर(सामान्य)07:43 – 09:22
- लाभ(शुभ)09:22 – 11:00
- अमृत(शुभ)11:00 – 12:39
- काल(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:18
- शुभ(शुभ)14:18 – 15:57
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:57 – 17:36
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:36 – 19:15
रात
- शुभ(शुभ)19:15 – 20:36
- अमृत(शुभ)20:36 – 21:57
- चर(सामान्य)21:57 – 23:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:18 – 00:39 (10 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:39 (10 जुल॰) – 02:01 (10 जुल॰)
- लाभ(शुभ)02:01 (10 जुल॰) – 03:22 (10 जुल॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:22 (10 जुल॰) – 04:43 (10 जुल॰)
- शुभ(शुभ)04:43 (10 जुल॰) – 06:04 (10 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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