पंचांग 20 जून 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 जून 2028 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:58
सूर्यास्त19:13
चंद्रोदय04:17 (21 जून)
चंद्रास्त17:02
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 02:48 (21 जून) तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 01:38 (22 जून) तक
नक्षत्र
कृत्तिका 23:35 तक, फिर रोहिणी 23:14 (21 जून) तक
योग
धृति 01:16 (21 जून) तक, फिर शूल 23:20 (21 जून) तक
करण
गर 15:10 तक, फिर वणिज 02:48 (21 जून) तक, फिर विष्टि 14:17 (21 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 13:02
  • राहु काल15:54 – 17:34
  • यमगंड09:17 – 10:56
  • गुलिक काल12:36 – 14:15

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:58 – 07:38
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:38 – 09:17
  • चर(सामान्य)09:17 – 10:56
  • लाभ(शुभ)10:56 – 12:36
  • अमृत(शुभ)12:36 – 14:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:54
  • शुभ(शुभ)15:54 – 17:34
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:34 – 19:13

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:13 – 20:34
  • लाभ(शुभ)20:34 – 21:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:54 – 23:15
  • शुभ(शुभ)23:15 – 00:36 (21 जून)
  • अमृत(शुभ)00:36 (21 जून) – 01:57 (21 जून)
  • चर(सामान्य)01:57 (21 जून) – 03:17 (21 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:17 (21 जून) – 04:38 (21 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:38 (21 जून) – 05:59 (21 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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