पंचांग 5 अप्रैल 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

5 अप्रैल 2028 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय14:48
चंद्रास्त03:45 (6 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कर्क 21:41 तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल दशमी 07:46 तक, फिर शुक्ल एकादशी 04:59 (6 अप्रैल) तक, फिर शुक्ल द्वादशी 01:52 (7 अप्रैल) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 21:41 तक, फिर मघा 19:27 (6 अप्रैल) तक
योग
धृति 13:14 तक, फिर शूल 09:44 (6 अप्रैल) तक
करण
गर 07:46 तक, फिर वणिज 18:25 तक, फिर विष्टि 04:59 (6 अप्रैल) तक, फिर बव 15:27 (6 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:02परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:37 – 14:10
  • यमगंड07:58 – 09:31
  • गुलिक काल11:04 – 12:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:25 – 07:58
  • अमृत(शुभ)07:58 – 09:31
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:31 – 11:04
  • शुभ(शुभ)11:04 – 12:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:10
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:10 – 15:43
  • चर(सामान्य)15:43 – 17:16
  • लाभ(शुभ)17:16 – 18:49

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:49 – 20:16
  • शुभ(शुभ)20:16 – 21:43
  • अमृत(शुभ)21:43 – 23:09
  • चर(सामान्य)23:09 – 00:36 (6 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:36 (6 अप्रैल) – 02:03 (6 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (6 अप्रैल) – 03:30 (6 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)03:30 (6 अप्रैल) – 04:57 (6 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:57 (6 अप्रैल) – 06:24 (6 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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