पंचांग 24 दिसंबर 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
24 दिसंबर 2027 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:03
सूर्यास्त18:04
चंद्रोदय04:42 (25 दिस॰)
चंद्रास्त15:04
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- तुला 18:39 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी 23:08 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 23:32 (25 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 00:50 (25 दिस॰) तक, फिर अनुराधा 01:49 (26 दिस॰) तक
- योग
- सुकर्मा 10:17 तक, फिर धृति 09:11 (25 दिस॰) तक
- करण
- कौलव 11:07 तक, फिर तैतिल 23:08 तक, फिर गर 11:17 (25 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:11 – 12:55
- राहु काल11:11 – 12:33
- यमगंड15:19 – 16:41
- गुलिक काल08:25 – 09:48
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)07:03 – 08:25
- लाभ(शुभ)08:25 – 09:48
- अमृत(शुभ)09:48 – 11:11
- काल(वर्जित (परंपरा))11:11 – 12:33
- शुभ(शुभ)12:33 – 13:56
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:56 – 15:19
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:19 – 16:41
- चर(सामान्य)16:41 – 18:04
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:04 – 19:41
- काल(वर्जित (परंपरा))19:41 – 21:19
- लाभ(शुभ)21:19 – 22:56
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:56 – 00:34 (25 दिस॰)
- शुभ(शुभ)00:34 (25 दिस॰) – 02:11 (25 दिस॰)
- अमृत(शुभ)02:11 (25 दिस॰) – 03:48 (25 दिस॰)
- चर(सामान्य)03:48 (25 दिस॰) – 05:26 (25 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:26 (25 दिस॰) – 07:03 (25 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें