पंचांग 19 दिसंबर 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
19 दिसंबर 2027 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:00
सूर्यास्त18:02
चंद्रोदय23:57
चंद्रास्त11:38
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 03:34 (20 दिस॰) तक, फिर कृष्ण अष्टमी 01:53 (21 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाफाल्गुनी 02:07 (20 दिस॰) तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 01:04 (21 दिस॰) तक
- योग
- प्रीति 20:37 तक, फिर आयुष्मान 17:56 (20 दिस॰) तक
- करण
- विष्टि 16:32 तक, फिर बव 03:34 (20 दिस॰) तक, फिर बालव 14:40 (20 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:53
- राहु काल16:39 – 18:02
- यमगंड12:31 – 13:54
- गुलिक काल15:16 – 16:39
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:00 – 08:23
- चर(सामान्य)08:23 – 09:46
- लाभ(शुभ)09:46 – 11:08
- अमृत(शुभ)11:08 – 12:31
- काल(वर्जित (परंपरा))12:31 – 13:54
- शुभ(शुभ)13:54 – 15:16
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:16 – 16:39
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:39 – 18:02
रात
- शुभ(शुभ)18:02 – 19:39
- अमृत(शुभ)19:39 – 21:16
- चर(सामान्य)21:16 – 22:54
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:54 – 00:31 (20 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:31 (20 दिस॰) – 02:09 (20 दिस॰)
- लाभ(शुभ)02:09 (20 दिस॰) – 03:46 (20 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:46 (20 दिस॰) – 05:23 (20 दिस॰)
- शुभ(शुभ)05:23 (20 दिस॰) – 07:01 (20 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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