पंचांग 11 दिसंबर 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 दिसंबर 2027 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:56
सूर्यास्त17:58
चंद्रोदय15:47
चंद्रास्त05:23 (12 दिस॰)
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
मेष 23:27 तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 01:43 (12 दिस॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 23:55 (12 दिस॰) तक
नक्षत्र
भरणी 17:37 तक, फिर कृत्तिका 16:42 (12 दिस॰) तक
योग
शिव 01:49 (12 दिस॰) तक, फिर सिद्ध 23:09 (12 दिस॰) तक
करण
कौलव 14:23 तक, फिर तैतिल 01:43 (12 दिस॰) तक, फिर गर 12:53 (12 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:49
  • राहु काल09:41 – 11:04
  • यमगंड13:50 – 15:13
  • गुलिक काल06:56 – 08:19

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:56 – 08:19
  • शुभ(शुभ)08:19 – 09:41
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:41 – 11:04
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:04 – 12:27
  • चर(सामान्य)12:27 – 13:50
  • लाभ(शुभ)13:50 – 15:13
  • अमृत(शुभ)15:13 – 16:36
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:36 – 17:58

रात

  • लाभ(शुभ)17:58 – 19:36
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:36 – 21:13
  • शुभ(शुभ)21:13 – 22:50
  • अमृत(शुभ)22:50 – 00:27 (12 दिस॰)
  • चर(सामान्य)00:27 (12 दिस॰) – 02:05 (12 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:05 (12 दिस॰) – 03:42 (12 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:42 (12 दिस॰) – 05:19 (12 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)05:19 (12 दिस॰) – 06:56 (12 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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