पंचांग 19 अक्टूबर 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
19 अक्टूबर 2027 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:09
चंद्रोदय21:03
चंद्रास्त09:52
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्थी 16:42 तक, फिर कृष्ण पंचमी 15:19 (20 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 23:16 तक, फिर मृगशीर्ष 22:30 (20 अक्टू॰) तक
- योग
- व्यतीपात 09:17 तक, फिर वरीयान 07:05 (20 अक्टू॰) तक
- करण
- बालव 16:42 तक, फिर कौलव 04:02 (20 अक्टू॰) तक, फिर तैतिल 15:19 (20 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:42
- राहु काल15:14 – 16:42
- यमगंड09:24 – 10:51
- गुलिक काल12:19 – 13:47
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:29 – 07:56
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:56 – 09:24
- चर(सामान्य)09:24 – 10:51
- लाभ(शुभ)10:51 – 12:19
- अमृत(शुभ)12:19 – 13:47
- काल(वर्जित (परंपरा))13:47 – 15:14
- शुभ(शुभ)15:14 – 16:42
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:42 – 18:09
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:09 – 19:42
- लाभ(शुभ)19:42 – 21:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:14 – 22:47
- शुभ(शुभ)22:47 – 00:19 (20 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)00:19 (20 अक्टू॰) – 01:52 (20 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)01:52 (20 अक्टू॰) – 03:24 (20 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (20 अक्टू॰) – 04:57 (20 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:57 (20 अक्टू॰) – 06:29 (20 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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