पंचांग 24 अप्रैल 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
24 अप्रैल 2027 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:11
सूर्यास्त18:53
चंद्रोदय22:14
चंद्रास्त08:25
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्थी 05:42 (25 अप्रैल) तक, फिर कृष्ण पंचमी 07:37 (26 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- अनुराधा 06:57 तक, फिर ज्येष्ठा 08:57 (25 अप्रैल) तक
- योग
- वरीयान 13:58 तक, फिर परिघ 14:11 (25 अप्रैल) तक
- करण
- बव 16:57 तक, फिर बालव 05:42 (25 अप्रैल) तक, फिर कौलव 18:36 (25 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:58
- राहु काल09:22 – 10:57
- यमगंड14:08 – 15:43
- गुलिक काल06:11 – 07:47
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:11 – 07:47
- शुभ(शुभ)07:47 – 09:22
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:22 – 10:57
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:32
- चर(सामान्य)12:32 – 14:08
- लाभ(शुभ)14:08 – 15:43
- अमृत(शुभ)15:43 – 17:18
- काल(वर्जित (परंपरा))17:18 – 18:53
रात
- लाभ(शुभ)18:53 – 20:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:18 – 21:43
- शुभ(शुभ)21:43 – 23:07
- अमृत(शुभ)23:07 – 00:32 (25 अप्रैल)
- चर(सामान्य)00:32 (25 अप्रैल) – 01:57 (25 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:57 (25 अप्रैल) – 03:21 (25 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:21 (25 अप्रैल) – 04:46 (25 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)04:46 (25 अप्रैल) – 06:11 (25 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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