पंचांग 27 मार्च 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 मार्च 2027 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय23:31
चंद्रास्त09:44
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 13:33 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 15:05 (28 मार्च) तक
नक्षत्र
अनुराधा 22:15 तक, फिर ज्येष्ठा 00:32 (29 मार्च) तक
योग
सिद्धि 05:42 (28 मार्च) तक, फिर व्यतीपात 06:07 (29 मार्च) तक
करण
तैतिल 13:33 तक, फिर गर 02:14 (28 मार्च) तक, फिर वणिज 15:05 (28 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 13:04
  • राहु काल09:36 – 11:08
  • यमगंड14:11 – 15:43
  • गुलिक काल06:33 – 08:05

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:33 – 08:05
  • शुभ(शुभ)08:05 – 09:36
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:36 – 11:08
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:08 – 12:40
  • चर(सामान्य)12:40 – 14:11
  • लाभ(शुभ)14:11 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:47

रात

  • लाभ(शुभ)18:47 – 20:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
  • शुभ(शुभ)21:43 – 23:11
  • अमृत(शुभ)23:11 – 00:39 (28 मार्च)
  • चर(सामान्य)00:39 (28 मार्च) – 02:07 (28 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:07 (28 मार्च) – 03:36 (28 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:36 (28 मार्च) – 05:04 (28 मार्च)
  • लाभ(शुभ)05:04 (28 मार्च) – 06:32 (28 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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