पंचांग 9 मार्च 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

9 मार्च 2027 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:47
सूर्यास्त18:42
चंद्रोदय07:07
चंद्रास्त19:35
मास:
फाल्गुन (अमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 15:41 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 15:53 (10 मार्च) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 09:58 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 10:52 (10 मार्च) तक
योग
शुभ 01:58 (10 मार्च) तक, फिर शुक्ल 00:50 (11 मार्च) तक
करण
बव 15:41 तक, फिर बालव 03:51 (10 मार्च) तक, फिर कौलव 15:53 (10 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:09
  • राहु काल15:43 – 17:13
  • यमगंड09:46 – 11:15
  • गुलिक काल12:45 – 14:14

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:47 – 08:17
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:17 – 09:46
  • चर(सामान्य)09:46 – 11:15
  • लाभ(शुभ)11:15 – 12:45
  • अमृत(शुभ)12:45 – 14:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:43
  • शुभ(शुभ)15:43 – 17:13
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:13 – 18:42

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:42 – 20:13
  • लाभ(शुभ)20:13 – 21:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:14
  • शुभ(शुभ)23:14 – 00:44 (10 मार्च)
  • अमृत(शुभ)00:44 (10 मार्च) – 02:15 (10 मार्च)
  • चर(सामान्य)02:15 (10 मार्च) – 03:46 (10 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:46 (10 मार्च) – 05:16 (10 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:16 (10 मार्च) – 06:47 (10 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें