पंचांग 13 जनवरी 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

13 जनवरी 2027 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:16
चंद्रोदय10:31
चंद्रास्त22:52
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
कुंभ 15:40 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 13:02 तक, फिर शुक्ल षष्ठी 13:59 (14 जन॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 22:04 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 23:18 (14 जन॰) तक
योग
वरीयान 17:54 तक, फिर परिघ 17:22 (14 जन॰) तक
करण
बालव 13:02 तक, फिर कौलव 01:35 (14 जन॰) तक, फिर तैतिल 13:59 (14 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:20 – 13:05परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:43 – 14:06
  • यमगंड08:32 – 09:56
  • गुलिक काल11:19 – 12:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:09 – 08:32
  • अमृत(शुभ)08:32 – 09:56
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:56 – 11:19
  • शुभ(शुभ)11:19 – 12:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:43 – 14:06
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:06 – 15:29
  • चर(सामान्य)15:29 – 16:53
  • लाभ(शुभ)16:53 – 18:16

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:16 – 19:53
  • शुभ(शुभ)19:53 – 21:29
  • अमृत(शुभ)21:29 – 23:06
  • चर(सामान्य)23:06 – 00:43 (14 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:43 (14 जन॰) – 02:19 (14 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:19 (14 जन॰) – 03:56 (14 जन॰)
  • लाभ(शुभ)03:56 (14 जन॰) – 05:33 (14 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:33 (14 जन॰) – 07:09 (14 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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