पंचांग 27 दिसंबर 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 दिसंबर 2026 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:04
सूर्यास्त18:06
चंद्रोदय21:48
चंद्रास्त09:59
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
कर्क 18:04 तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 17:13 तक, फिर कृष्ण पंचमी 14:58 (28 दिस॰) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 18:04 तक, फिर मघा 16:33 (28 दिस॰) तक
योग
विष्कम्भ 20:53 तक, फिर प्रीति 17:55 (28 दिस॰) तक
करण
बालव 17:13 तक, फिर कौलव 04:01 (28 दिस॰) तक, फिर तैतिल 14:58 (28 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 12:57
  • राहु काल16:43 – 18:06
  • यमगंड12:35 – 13:58
  • गुलिक काल15:20 – 16:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:04 – 08:27
  • चर(सामान्य)08:27 – 09:50
  • लाभ(शुभ)09:50 – 11:12
  • अमृत(शुभ)11:12 – 12:35
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:35 – 13:58
  • शुभ(शुभ)13:58 – 15:20
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:20 – 16:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:43 – 18:06

रात

  • शुभ(शुभ)18:06 – 19:43
  • अमृत(शुभ)19:43 – 21:20
  • चर(सामान्य)21:20 – 22:58
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:58 – 00:35 (28 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:35 (28 दिस॰) – 02:13 (28 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)02:13 (28 दिस॰) – 03:50 (28 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:50 (28 दिस॰) – 05:27 (28 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)05:27 (28 दिस॰) – 07:05 (28 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें