पंचांग 25 नवंबर 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
25 नवंबर 2026 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:46
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय18:35
चंद्रास्त07:23
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण प्रतिपदा 16:50 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 13:15 (26 नव॰) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 20:36 तक, फिर मृगशीर्ष 17:47 (26 नव॰) तक
- योग
- शिव 12:00 तक, फिर सिद्ध 07:49 (26 नव॰) तक
- करण
- कौलव 16:50 तक, फिर तैतिल 03:02 (26 नव॰) तक, फिर गर 13:15 (26 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:43परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:21 – 13:45
- यमगंड08:10 – 09:34
- गुलिक काल10:57 – 12:21
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:46 – 08:10
- अमृत(शुभ)08:10 – 09:34
- काल(वर्जित (परंपरा))09:34 – 10:57
- शुभ(शुभ)10:57 – 12:21
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:21 – 13:45
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:45 – 15:08
- चर(सामान्य)15:08 – 16:32
- लाभ(शुभ)16:32 – 17:56
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:32
- शुभ(शुभ)19:32 – 21:08
- अमृत(शुभ)21:08 – 22:45
- चर(सामान्य)22:45 – 00:21 (26 नव॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:21 (26 नव॰) – 01:58 (26 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:58 (26 नव॰) – 03:34 (26 नव॰)
- लाभ(शुभ)03:34 (26 नव॰) – 05:10 (26 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:10 (26 नव॰) – 06:47 (26 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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