पंचांग 11 नवंबर 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 नवंबर 2026 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:38
सूर्यास्त17:58
चंद्रोदय08:19
चंद्रास्त19:23
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 15:53 तक, फिर शुक्ल तृतीया 18:09 (12 नव॰) तक
नक्षत्र
अनुराधा 11:38 तक, फिर ज्येष्ठा 14:19 (12 नव॰) तक
योग
अतिगण्ड 03:40 (12 नव॰) तक, फिर सुकर्मा 04:26 (13 नव॰) तक
करण
कौलव 15:53 तक, फिर तैतिल 04:59 (12 नव॰) तक, फिर गर 18:09 (12 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:18 – 13:43
  • यमगंड08:03 – 09:28
  • गुलिक काल10:53 – 12:18

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:38 – 08:03
  • अमृत(शुभ)08:03 – 09:28
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:28 – 10:53
  • शुभ(शुभ)10:53 – 12:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:43 – 15:08
  • चर(सामान्य)15:08 – 16:33
  • लाभ(शुभ)16:33 – 17:58

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:58 – 19:33
  • शुभ(शुभ)19:33 – 21:08
  • अमृत(शुभ)21:08 – 22:43
  • चर(सामान्य)22:43 – 00:18 (12 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:18 (12 नव॰) – 01:53 (12 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:53 (12 नव॰) – 03:29 (12 नव॰)
  • लाभ(शुभ)03:29 (12 नव॰) – 05:04 (12 नव॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:04 (12 नव॰) – 06:39 (12 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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