पंचांग 2 अक्टूबर 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
2 अक्टूबर 2026 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:22
चंद्रोदय23:02
चंद्रास्त11:54
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- वृषभ 15:40 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण षष्ठी 10:15 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 08:00 (3 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 02:55 (3 अक्टू॰) तक, फिर आर्द्रा 01:29 (4 अक्टू॰) तक
- योग
- व्यतीपात 18:17 तक, फिर वरीयान 15:21 (3 अक्टू॰) तक
- करण
- वणिज 10:15 तक, फिर विष्टि 21:07 तक, फिर बव 08:00 (3 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:47
- राहु काल10:54 – 12:23
- यमगंड15:23 – 16:52
- गुलिक काल07:54 – 09:24
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:25 – 07:54
- लाभ(शुभ)07:54 – 09:24
- अमृत(शुभ)09:24 – 10:54
- काल(वर्जित (परंपरा))10:54 – 12:23
- शुभ(शुभ)12:23 – 13:53
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:53 – 15:23
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:23 – 16:52
- चर(सामान्य)16:52 – 18:22
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:22 – 19:52
- काल(वर्जित (परंपरा))19:52 – 21:23
- लाभ(शुभ)21:23 – 22:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:53 – 00:23 (3 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)00:23 (3 अक्टू॰) – 01:54 (3 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)01:54 (3 अक्टू॰) – 03:24 (3 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)03:24 (3 अक्टू॰) – 04:55 (3 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:55 (3 अक्टू॰) – 06:25 (3 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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