पंचांग 11 सितंबर 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
11 सितंबर 2026 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:40
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:46
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- सिंह 19:08 तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 08:57 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 07:46 (12 सित॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाफाल्गुनी 13:16 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 12:55 (12 सित॰) तक
- योग
- साध्य 17:02 तक, फिर शुभ 15:09 (12 सित॰) तक
- करण
- नाग 08:57 तक, फिर किंस्तुघ्न 20:18 तक, फिर बव 07:46 (12 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:55
- राहु काल10:58 – 12:31
- यमगंड15:35 – 17:08
- गुलिक काल07:54 – 09:26
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:21 – 07:54
- लाभ(शुभ)07:54 – 09:26
- अमृत(शुभ)09:26 – 10:58
- काल(वर्जित (परंपरा))10:58 – 12:31
- शुभ(शुभ)12:31 – 14:03
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:03 – 15:35
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:35 – 17:08
- चर(सामान्य)17:08 – 18:40
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:40 – 20:08
- काल(वर्जित (परंपरा))20:08 – 21:35
- लाभ(शुभ)21:35 – 23:03
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:03 – 00:31 (12 सित॰)
- शुभ(शुभ)00:31 (12 सित॰) – 01:58 (12 सित॰)
- अमृत(शुभ)01:58 (12 सित॰) – 03:26 (12 सित॰)
- चर(सामान्य)03:26 (12 सित॰) – 04:54 (12 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (12 सित॰) – 06:21 (12 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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