पंचांग 15 अगस्त 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 अगस्त 2026 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:16
सूर्यास्त19:01
चंद्रोदय08:33
चंद्रास्त20:51
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
सिंह 09:34 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 17:29 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 16:53 (16 अग॰) तक
नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी 03:25 (16 अग॰) तक, फिर हस्त 03:50 (17 अग॰) तक
योग
शिव 07:09 तक, फिर सिद्ध 05:21 (16 अग॰) तक, फिर साध्य 04:08 (17 अग॰) तक
करण
गर 17:29 तक, फिर वणिज 05:05 (16 अग॰) तक, फिर विष्टि 16:53 (16 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:04
  • राहु काल09:27 – 11:03
  • यमगंड14:14 – 15:50
  • गुलिक काल06:16 – 07:51

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:16 – 07:51
  • शुभ(शुभ)07:51 – 09:27
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:38
  • चर(सामान्य)12:38 – 14:14
  • लाभ(शुभ)14:14 – 15:50
  • अमृत(शुभ)15:50 – 17:26
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:26 – 19:01

रात

  • लाभ(शुभ)19:01 – 20:26
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:26 – 21:50
  • शुभ(शुभ)21:50 – 23:14
  • अमृत(शुभ)23:14 – 00:39 (16 अग॰)
  • चर(सामान्य)00:39 (16 अग॰) – 02:03 (16 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:03 (16 अग॰) – 03:27 (16 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (16 अग॰) – 04:52 (16 अग॰)
  • लाभ(शुभ)04:52 (16 अग॰) – 06:16 (16 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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