पंचांग 11 अगस्त 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 अगस्त 2026 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:15
सूर्यास्त19:04
चंद्रोदय05:35 (12 अग॰)
चंद्रास्त18:06
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 01:53 (12 अग॰) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 23:06 (12 अग॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 10:09 तक, फिर पुष्य 07:59 (12 अग॰) तक
योग
सिद्धि 18:51 तक, फिर व्यतीपात 15:26 (12 अग॰) तक
करण
विष्टि 15:22 तक, फिर शकुनि 01:53 (12 अग॰) तक, फिर चतुष्पद 12:27 (12 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:05
  • राहु काल15:51 – 17:28
  • यमगंड09:27 – 11:03
  • गुलिक काल12:39 – 14:15

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:15 – 07:51
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:51 – 09:27
  • चर(सामान्य)09:27 – 11:03
  • लाभ(शुभ)11:03 – 12:39
  • अमृत(शुभ)12:39 – 14:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:51
  • शुभ(शुभ)15:51 – 17:28
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:28 – 19:04

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:04 – 20:28
  • लाभ(शुभ)20:28 – 21:52
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:52 – 23:15
  • शुभ(शुभ)23:15 – 00:39 (12 अग॰)
  • अमृत(शुभ)00:39 (12 अग॰) – 02:03 (12 अग॰)
  • चर(सामान्य)02:03 (12 अग॰) – 03:27 (12 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (12 अग॰) – 04:51 (12 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:51 (12 अग॰) – 06:15 (12 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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