पंचांग 15 जून 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 जून 2026 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त19:44
मास:
अधिक ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
वृषभ 08:41 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 08:24 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 04:31 (16 जून) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 00:53 (17 जून) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 19:08 तक, फिर आर्द्रा 16:12 (16 जून) तक
योग
शूल 08:55 तक, फिर गण्ड 04:39 (16 जून) तक, फिर वृद्धि 00:34 (17 जून) तक
करण
नाग 08:24 तक, फिर किंस्तुघ्न 18:26 तक, फिर बव 04:31 (16 जून) तक, फिर बालव 14:39 (16 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 13:01
  • राहु काल07:37 – 09:16
  • यमगंड10:55 – 12:35
  • गुलिक काल14:14 – 15:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)05:57 – 07:37
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:37 – 09:16
  • शुभ(शुभ)09:16 – 10:55
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:55 – 12:35
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:35 – 14:14
  • चर(सामान्य)14:14 – 15:53
  • लाभ(शुभ)15:53 – 17:32
  • अमृत(शुभ)17:32 – 19:12

रात

  • चर(सामान्य)19:12 – 20:32
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:32 – 21:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:53 – 23:14
  • लाभ(शुभ)23:14 – 00:35 (16 जून)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:35 (16 जून) – 01:55 (16 जून)
  • शुभ(शुभ)01:55 (16 जून) – 03:16 (16 जून)
  • अमृत(शुभ)03:16 (16 जून) – 04:37 (16 जून)
  • चर(सामान्य)04:37 (16 जून) – 05:58 (16 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें