पंचांग 15 मई 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
15 मई 2026 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:00
सूर्यास्त19:01
चंद्रोदय05:08 (16 मई)
चंद्रास्त17:33
- मास:
- वैशाख (अमांत) · ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 08:31 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 05:11 (16 मई) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 01:31 (17 मई) तक
- नक्षत्र
- अश्विनी 20:15 तक, फिर भरणी 17:30 (16 मई) तक
- योग
- आयुष्मान 14:21 तक, फिर सौभाग्य 10:25 (16 मई) तक
- करण
- वणिज 08:31 तक, फिर विष्टि 18:54 तक, फिर शकुनि 05:11 (16 मई) तक, फिर चतुष्पद 15:23 (16 मई) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:56
- राहु काल10:53 – 12:30
- यमगंड15:46 – 17:23
- गुलिक काल07:38 – 09:15
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:00 – 07:38
- लाभ(शुभ)07:38 – 09:15
- अमृत(शुभ)09:15 – 10:53
- काल(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:30
- शुभ(शुभ)12:30 – 14:08
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:46
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:46 – 17:23
- चर(सामान्य)17:23 – 19:01
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:01 – 20:23
- काल(वर्जित (परंपरा))20:23 – 21:45
- लाभ(शुभ)21:45 – 23:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:30 (16 मई)
- शुभ(शुभ)00:30 (16 मई) – 01:53 (16 मई)
- अमृत(शुभ)01:53 (16 मई) – 03:15 (16 मई)
- चर(सामान्य)03:15 (16 मई) – 04:38 (16 मई)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:38 (16 मई) – 06:00 (16 मई)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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