पंचांग 25 फ़रवरी 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 फ़रवरी 2026 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:56
सूर्यास्त18:39
चंद्रोदय12:34
चंद्रास्त02:30 (26 फ़र॰)
मास:
फाल्गुन (अमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
वृषभ 00:54 (26 फ़र॰) तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 02:41 (26 फ़र॰) तक, फिर शुक्ल दशमी 00:33 (27 फ़र॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 13:38 तक, फिर मृगशीर्ष 12:11 (26 फ़र॰) तक
योग
विष्कम्भ 01:28 (26 फ़र॰) तक, फिर प्रीति 22:33 (26 फ़र॰) तक
करण
बालव 15:46 तक, फिर कौलव 02:41 (26 फ़र॰) तक, फिर तैतिल 13:37 (26 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:11परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:47 – 14:15
  • यमगंड08:24 – 09:52
  • गुलिक काल11:19 – 12:47

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:56 – 08:24
  • अमृत(शुभ)08:24 – 09:52
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:52 – 11:19
  • शुभ(शुभ)11:19 – 12:47
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:47 – 14:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:43
  • चर(सामान्य)15:43 – 17:11
  • लाभ(शुभ)17:11 – 18:39

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:39 – 20:11
  • शुभ(शुभ)20:11 – 21:43
  • अमृत(शुभ)21:43 – 23:15
  • चर(सामान्य)23:15 – 00:47 (26 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:47 (26 फ़र॰) – 02:19 (26 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:19 (26 फ़र॰) – 03:51 (26 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)03:51 (26 फ़र॰) – 05:23 (26 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:23 (26 फ़र॰) – 06:55 (26 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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