पंचांग 1 दिसंबर 2025

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 दिसंबर 2025 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:50
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय14:45
चंद्रास्त03:43 (2 दिस॰)
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
मीन 23:18 तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 19:01 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 15:57 (2 दिस॰) तक
नक्षत्र
रेवती 23:18 तक, फिर अश्विनी 20:51 (2 दिस॰) तक
योग
व्यतीपात 00:58 (2 दिस॰) तक, फिर वरीयान 21:08 (2 दिस॰) तक
करण
वणिज 08:20 तक, फिर विष्टि 19:01 तक, फिर बव 05:33 (2 दिस॰) तक, फिर बालव 15:57 (2 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:45
  • राहु काल08:13 – 09:37
  • यमगंड11:00 – 12:23
  • गुलिक काल13:46 – 15:10

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:50 – 08:13
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:13 – 09:37
  • शुभ(शुभ)09:37 – 11:00
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:00 – 12:23
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:23 – 13:46
  • चर(सामान्य)13:46 – 15:10
  • लाभ(शुभ)15:10 – 16:33
  • अमृत(शुभ)16:33 – 17:56

रात

  • चर(सामान्य)17:56 – 19:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:33 – 21:10
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:10 – 22:47
  • लाभ(शुभ)22:47 – 00:23 (2 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:23 (2 दिस॰) – 02:00 (2 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)02:00 (2 दिस॰) – 03:37 (2 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)03:37 (2 दिस॰) – 05:14 (2 दिस॰)
  • चर(सामान्य)05:14 (2 दिस॰) – 06:51 (2 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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