पंचांग 12 अक्टूबर 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
12 अक्टूबर 2025 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:14
चंद्रोदय22:56
चंद्रास्त11:50
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण षष्ठी 14:17 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 12:24 (13 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 13:36 तक, फिर आर्द्रा 12:27 (13 अक्टू॰) तक
- योग
- वरीयान 10:55 तक, फिर परिघ 08:10 (13 अक्टू॰) तक
- करण
- वणिज 14:17 तक, फिर विष्टि 01:16 (13 अक्टू॰) तक, फिर बव 12:24 (13 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:44
- राहु काल16:45 – 18:14
- यमगंड12:20 – 13:49
- गुलिक काल15:17 – 16:45
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:27 – 07:55
- चर(सामान्य)07:55 – 09:24
- लाभ(शुभ)09:24 – 10:52
- अमृत(शुभ)10:52 – 12:20
- काल(वर्जित (परंपरा))12:20 – 13:49
- शुभ(शुभ)13:49 – 15:17
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:17 – 16:45
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:45 – 18:14
रात
- शुभ(शुभ)18:14 – 19:45
- अमृत(शुभ)19:45 – 21:17
- चर(सामान्य)21:17 – 22:49
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:49 – 00:21 (13 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:21 (13 अक्टू॰) – 01:52 (13 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)01:52 (13 अक्टू॰) – 03:24 (13 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (13 अक्टू॰) – 04:56 (13 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)04:56 (13 अक्टू॰) – 06:27 (13 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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