पंचांग 5 अक्टूबर 2025

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

5 अक्टूबर 2025 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:19
चंद्रोदय17:04
चंद्रास्त05:21 (6 अक्टू॰)
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
कुंभ 00:45 (6 अक्टू॰) तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 15:04 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 12:24 (6 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
शतभिषा 08:01 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 06:16 (6 अक्टू॰) तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 04:02 (7 अक्टू॰) तक
योग
गण्ड 16:34 तक, फिर वृद्धि 13:13 (6 अक्टू॰) तक
करण
तैतिल 15:04 तक, फिर गर 01:48 (6 अक्टू॰) तक, फिर वणिज 12:24 (6 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:46
  • राहु काल16:50 – 18:19
  • यमगंड12:22 – 13:52
  • गुलिक काल15:21 – 16:50

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:55
  • चर(सामान्य)07:55 – 09:24
  • लाभ(शुभ)09:24 – 10:53
  • अमृत(शुभ)10:53 – 12:22
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:22 – 13:52
  • शुभ(शुभ)13:52 – 15:21
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:21 – 16:50
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:50 – 18:19

रात

  • शुभ(शुभ)18:19 – 19:50
  • अमृत(शुभ)19:50 – 21:21
  • चर(सामान्य)21:21 – 22:52
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:52 – 00:22 (6 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:22 (6 अक्टू॰) – 01:53 (6 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)01:53 (6 अक्टू॰) – 03:24 (6 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (6 अक्टू॰) – 04:55 (6 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)04:55 (6 अक्टू॰) – 06:26 (6 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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