पंचांग 17 सितंबर 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 सितंबर 2025 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय03:06 (18 सित॰)
चंद्रास्त15:44
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण एकादशी 23:40 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 23:24 (18 सित॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 06:26 तक, फिर पुष्य 06:32 (18 सित॰) तक
- योग
- परिघ 22:54 तक, फिर शिव 21:37 (18 सित॰) तक
- करण
- बव 11:58 तक, फिर बालव 23:40 तक, फिर कौलव 11:29 (18 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:53परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:28 – 14:00
- यमगंड07:54 – 09:25
- गुलिक काल10:57 – 12:28
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:22 – 07:54
- अमृत(शुभ)07:54 – 09:25
- काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:57
- शुभ(शुभ)10:57 – 12:28
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:28 – 14:00
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:32
- चर(सामान्य)15:32 – 17:03
- लाभ(शुभ)17:03 – 18:35
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:35 – 20:03
- शुभ(शुभ)20:03 – 21:32
- अमृत(शुभ)21:32 – 23:00
- चर(सामान्य)23:00 – 00:28 (18 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:28 (18 सित॰) – 01:57 (18 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:57 (18 सित॰) – 03:25 (18 सित॰)
- लाभ(शुभ)03:25 (18 सित॰) – 04:54 (18 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (18 सित॰) – 06:22 (18 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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