पंचांग 14 सितंबर 2025

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 सितंबर 2025 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:37
चंद्रोदय00:01 (15 सित॰)
चंद्रास्त12:56
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृषभ 20:03 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 03:06 (15 सित॰) तक, फिर कृष्ण नवमी 01:31 (16 सित॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 08:41 तक, फिर मृगशीर्ष 07:31 (15 सित॰) तक
योग
वज्र 07:35 तक, फिर सिद्धि 04:55 (15 सित॰) तक, फिर व्यतीपात 02:34 (16 सित॰) तक
करण
बालव 16:02 तक, फिर कौलव 03:06 (15 सित॰) तक, फिर तैतिल 14:16 (15 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:54
  • राहु काल17:05 – 18:37
  • यमगंड12:29 – 14:01
  • गुलिक काल15:33 – 17:05

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:22 – 07:54
  • चर(सामान्य)07:54 – 09:26
  • लाभ(शुभ)09:26 – 10:58
  • अमृत(शुभ)10:58 – 12:29
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:29 – 14:01
  • शुभ(शुभ)14:01 – 15:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:33 – 17:05
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:05 – 18:37

रात

  • शुभ(शुभ)18:37 – 20:05
  • अमृत(शुभ)20:05 – 21:33
  • चर(सामान्य)21:33 – 23:01
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:01 – 00:30 (15 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:30 (15 सित॰) – 01:58 (15 सित॰)
  • लाभ(शुभ)01:58 (15 सित॰) – 03:26 (15 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:26 (15 सित॰) – 04:54 (15 सित॰)
  • शुभ(शुभ)04:54 (15 सित॰) – 06:22 (15 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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