पंचांग 23 अप्रैल 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
23 अप्रैल 2025 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:12
सूर्यास्त18:53
चंद्रोदय03:26 (24 अप्रैल)
चंद्रास्त14:30
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 16:43 तक, फिर कृष्ण एकादशी 14:32 (24 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- धनिष्ठा 12:07 तक, फिर शतभिषा 10:49 (24 अप्रैल) तक
- योग
- शुक्ल 18:51 तक, फिर ब्रह्म 15:55 (24 अप्रैल) तक
- करण
- विष्टि 16:43 तक, फिर बव 03:43 (24 अप्रैल) तक, फिर बालव 14:32 (24 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:58परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:32 – 14:08
- यमगंड07:47 – 09:22
- गुलिक काल10:57 – 12:32
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:12 – 07:47
- अमृत(शुभ)07:47 – 09:22
- काल(वर्जित (परंपरा))09:22 – 10:57
- शुभ(शुभ)10:57 – 12:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:32 – 14:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:18
- लाभ(शुभ)17:18 – 18:53
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:53 – 20:18
- शुभ(शुभ)20:18 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:07
- चर(सामान्य)23:07 – 00:32 (24 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:32 (24 अप्रैल) – 01:57 (24 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:57 (24 अप्रैल) – 03:22 (24 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)03:22 (24 अप्रैल) – 04:46 (24 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:46 (24 अप्रैल) – 06:11 (24 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें