पंचांग 12 अप्रैल 2025

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 अप्रैल 2025 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय18:25
चंद्रास्त06:16 (13 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 05:52 (13 अप्रैल) तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 08:25 (14 अप्रैल) तक
नक्षत्र
हस्त 18:07 तक, फिर चित्रा 21:10 (13 अप्रैल) तक
योग
व्याघात 20:40 तक, फिर हर्षण 21:39 (13 अप्रैल) तक
करण
विष्टि 16:36 तक, फिर बव 05:52 (13 अप्रैल) तक, फिर बालव 19:08 (13 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:00
  • राहु काल09:27 – 11:01
  • यमगंड14:09 – 15:43
  • गुलिक काल06:20 – 07:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:20 – 07:53
  • शुभ(शुभ)07:53 – 09:27
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:01
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:35
  • चर(सामान्य)12:35 – 14:09
  • लाभ(शुभ)14:09 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:16
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:16 – 18:50

रात

  • लाभ(शुभ)18:50 – 20:16
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:16 – 21:42
  • शुभ(शुभ)21:42 – 23:08
  • अमृत(शुभ)23:08 – 00:35 (13 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)00:35 (13 अप्रैल) – 02:01 (13 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:01 (13 अप्रैल) – 03:27 (13 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (13 अप्रैल) – 04:53 (13 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)04:53 (13 अप्रैल) – 06:19 (13 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें