पंचांग 5 अप्रैल 2025

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

5 अप्रैल 2025 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय12:21
चंद्रास्त02:07 (6 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मिथुन 23:25 तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 19:26 तक, फिर शुक्ल नवमी 19:23 (6 अप्रैल) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 05:32 (6 अप्रैल) तक, फिर पुष्य 06:24 (7 अप्रैल) तक
योग
अतिगण्ड 20:03 तक, फिर सुकर्मा 18:55 (6 अप्रैल) तक
करण
विष्टि 07:44 तक, फिर बव 19:26 तक, फिर बालव 07:20 (6 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:02
  • राहु काल09:31 – 11:04
  • यमगंड14:10 – 15:43
  • गुलिक काल06:25 – 07:58

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:58
  • शुभ(शुभ)07:58 – 09:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:31 – 11:04
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:04 – 12:37
  • चर(सामान्य)12:37 – 14:10
  • लाभ(शुभ)14:10 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:16
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:16 – 18:49

रात

  • लाभ(शुभ)18:49 – 20:16
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:16 – 21:43
  • शुभ(शुभ)21:43 – 23:10
  • अमृत(शुभ)23:10 – 00:36 (6 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)00:36 (6 अप्रैल) – 02:03 (6 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:03 (6 अप्रैल) – 03:30 (6 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:30 (6 अप्रैल) – 04:57 (6 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)04:57 (6 अप्रैल) – 06:24 (6 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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