पंचांग 2 अप्रैल 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
2 अप्रैल 2025 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय09:21
चंद्रास्त23:11
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल पंचमी 23:50 तक, फिर शुक्ल षष्ठी 21:42 (3 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका 08:50 तक, फिर रोहिणी 07:02 (3 अप्रैल) तक
- योग
- आयुष्मान 02:49 (3 अप्रैल) तक, फिर सौभाग्य 00:01 (4 अप्रैल) तक
- करण
- बव 13:07 तक, फिर बालव 23:50 तक, फिर कौलव 10:41 (3 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:02परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:38 – 14:10
- यमगंड08:00 – 09:33
- गुलिक काल11:05 – 12:38
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:27 – 08:00
- अमृत(शुभ)08:00 – 09:33
- काल(वर्जित (परंपरा))09:33 – 11:05
- शुभ(शुभ)11:05 – 12:38
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:10
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:10 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:15
- लाभ(शुभ)17:15 – 18:48
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:48 – 20:15
- शुभ(शुभ)20:15 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:10
- चर(सामान्य)23:10 – 00:37 (3 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:37 (3 अप्रैल) – 02:05 (3 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:05 (3 अप्रैल) – 03:32 (3 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)03:32 (3 अप्रैल) – 04:59 (3 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:59 (3 अप्रैल) – 06:27 (3 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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