पंचांग 28 मार्च 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
28 मार्च 2025 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:32
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय06:15 (29 मार्च)
चंद्रास्त17:47
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
- संवत्सर:
- क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- कुंभ 16:47 तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 19:55 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 16:27 (29 मार्च) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 22:09 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 19:26 (29 मार्च) तक
- योग
- शुक्ल 02:07 (29 मार्च) तक, फिर ब्रह्म 22:03 (29 मार्च) तक
- करण
- विष्टि 09:33 तक, फिर शकुनि 19:55 तक, फिर चतुष्पद 06:13 (29 मार्च) तक, फिर नाग 16:27 (29 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:15 – 13:04
- राहु काल11:07 – 12:39
- यमगंड15:43 – 17:15
- गुलिक काल08:04 – 09:35
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:32 – 08:04
- लाभ(शुभ)08:04 – 09:35
- अमृत(शुभ)09:35 – 11:07
- काल(वर्जित (परंपरा))11:07 – 12:39
- शुभ(शुभ)12:39 – 14:11
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
- चर(सामान्य)17:15 – 18:47
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:47 – 20:15
- काल(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
- लाभ(शुभ)21:43 – 23:11
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:11 – 00:39 (29 मार्च)
- शुभ(शुभ)00:39 (29 मार्च) – 02:07 (29 मार्च)
- अमृत(शुभ)02:07 (29 मार्च) – 03:35 (29 मार्च)
- चर(सामान्य)03:35 (29 मार्च) – 05:03 (29 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:03 (29 मार्च) – 06:31 (29 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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