पंचांग 2 मार्च 2025

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

2 मार्च 2025 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:52
सूर्यास्त18:40
चंद्रोदय08:24
चंद्रास्त21:08
मास:
फाल्गुन (अमांत)
संवत:
शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
संवत्सर:
क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
मीन 06:39 (3 मार्च) तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 21:02 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 18:02 (3 मार्च) तक
नक्षत्र
उत्तरभाद्रपदा 08:59 तक, फिर रेवती 06:39 (3 मार्च) तक, फिर अश्विनी 04:29 (4 मार्च) तक
योग
शुभ 12:39 तक, फिर शुक्ल 08:57 (3 मार्च) तक
करण
तैतिल 10:35 तक, फिर गर 21:02 तक, फिर वणिज 07:31 (3 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:10
  • राहु काल17:12 – 18:40
  • यमगंड12:46 – 14:15
  • गुलिक काल15:43 – 17:12

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:52 – 08:21
  • चर(सामान्य)08:21 – 09:49
  • लाभ(शुभ)09:49 – 11:18
  • अमृत(शुभ)11:18 – 12:46
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:46 – 14:15
  • शुभ(शुभ)14:15 – 15:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:12 – 18:40

रात

  • शुभ(शुभ)18:40 – 20:12
  • अमृत(शुभ)20:12 – 21:43
  • चर(सामान्य)21:43 – 23:14
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:14 – 00:46 (3 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:46 (3 मार्च) – 02:17 (3 मार्च)
  • लाभ(शुभ)02:17 (3 मार्च) – 03:49 (3 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:49 (3 मार्च) – 05:20 (3 मार्च)
  • शुभ(शुभ)05:20 (3 मार्च) – 06:52 (3 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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