पंचांग 24 फ़रवरी 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
24 फ़रवरी 2025 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:56
सूर्यास्त18:38
चंद्रोदय04:48 (25 फ़र॰)
चंद्रास्त15:00
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
- संवत्सर:
- क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- धनु 00:56 (25 फ़र॰) तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण एकादशी 13:45 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 12:48 (25 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 18:59 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 18:30 (25 फ़र॰) तक
- योग
- सिद्धि 10:05 तक, फिर व्यतीपात 08:14 (25 फ़र॰) तक
- करण
- बालव 13:45 तक, फिर कौलव 01:22 (25 फ़र॰) तक, फिर तैतिल 12:48 (25 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:11
- राहु काल08:24 – 09:52
- यमगंड11:20 – 12:47
- गुलिक काल14:15 – 15:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:56 – 08:24
- काल(वर्जित (परंपरा))08:24 – 09:52
- शुभ(शुभ)09:52 – 11:20
- रोग(वर्जित (परंपरा))11:20 – 12:47
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:47 – 14:15
- चर(सामान्य)14:15 – 15:43
- लाभ(शुभ)15:43 – 17:11
- अमृत(शुभ)17:11 – 18:38
रात
- चर(सामान्य)18:38 – 20:10
- रोग(वर्जित (परंपरा))20:10 – 21:43
- काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:15
- लाभ(शुभ)23:15 – 00:47 (25 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:47 (25 फ़र॰) – 02:19 (25 फ़र॰)
- शुभ(शुभ)02:19 (25 फ़र॰) – 03:51 (25 फ़र॰)
- अमृत(शुभ)03:51 (25 फ़र॰) – 05:24 (25 फ़र॰)
- चर(सामान्य)05:24 (25 फ़र॰) – 06:56 (25 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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