पंचांग 14 फ़रवरी 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
14 फ़रवरी 2025 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:34
चंद्रोदय20:10
चंद्रास्त08:07
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
- संवत्सर:
- क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- सिंह 05:44 (15 फ़र॰) तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण द्वितीया 21:52 तक, फिर कृष्ण तृतीया 23:52 (15 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाफाल्गुनी 23:09 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 01:39 (16 फ़र॰) तक
- योग
- अतिगण्ड 07:20 तक, फिर सुकर्मा 07:32 (15 फ़र॰) तक
- करण
- तैतिल 09:03 तक, फिर गर 21:52 तक, फिर वणिज 10:49 (15 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
- राहु काल11:22 – 12:48
- यमगंड15:41 – 17:08
- गुलिक काल08:29 – 09:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)07:02 – 08:29
- लाभ(शुभ)08:29 – 09:55
- अमृत(शुभ)09:55 – 11:22
- काल(वर्जित (परंपरा))11:22 – 12:48
- शुभ(शुभ)12:48 – 14:15
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:41
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:41 – 17:08
- चर(सामान्य)17:08 – 18:34
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:34 – 20:08
- काल(वर्जित (परंपरा))20:08 – 21:41
- लाभ(शुभ)21:41 – 23:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:48 (15 फ़र॰)
- शुभ(शुभ)00:48 (15 फ़र॰) – 02:21 (15 फ़र॰)
- अमृत(शुभ)02:21 (15 फ़र॰) – 03:55 (15 फ़र॰)
- चर(सामान्य)03:55 (15 फ़र॰) – 05:28 (15 फ़र॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:28 (15 फ़र॰) – 07:02 (15 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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