पंचांग 4 सितंबर 2024

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

4 सितंबर 2024 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय07:10
चंद्रास्त19:36
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
संवत्सर:
क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
सिंह 09:55 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 09:47 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 12:21 (5 सित॰) तक
नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी 06:14 (5 सित॰) तक, फिर हस्त 09:25 (6 सित॰) तक
योग
साध्य 20:02 तक, फिर शुभ 21:07 (5 सित॰) तक
करण
बव 09:47 तक, फिर बालव 23:03 तक, फिर कौलव 12:21 (5 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:58परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:33 – 14:06
  • यमगंड07:53 – 09:26
  • गुलिक काल11:00 – 12:33

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:20 – 07:53
  • अमृत(शुभ)07:53 – 09:26
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:26 – 11:00
  • शुभ(शुभ)11:00 – 12:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:33 – 14:06
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:06 – 15:39
  • चर(सामान्य)15:39 – 17:12
  • लाभ(शुभ)17:12 – 18:46

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:46 – 20:12
  • शुभ(शुभ)20:12 – 21:39
  • अमृत(शुभ)21:39 – 23:06
  • चर(सामान्य)23:06 – 00:33 (5 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:33 (5 सित॰) – 02:00 (5 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:00 (5 सित॰) – 03:27 (5 सित॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (5 सित॰) – 04:53 (5 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:53 (5 सित॰) – 06:20 (5 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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