पंचांग 17 अगस्त 2024

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 अगस्त 2024 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:16
सूर्यास्त19:00
चंद्रोदय17:15
चंद्रास्त04:27 (18 अग॰)
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
संवत्सर:
क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
धनु 17:28 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 08:06 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 05:51 (18 अग॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 03:05 (19 अग॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 11:48 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 10:14 (18 अग॰) तक
योग
प्रीति 10:47 तक, फिर आयुष्मान 07:50 (18 अग॰) तक
करण
बालव 08:06 तक, फिर कौलव 19:03 तक, फिर तैतिल 05:51 (18 अग॰) तक, फिर गर 16:32 (18 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:03
  • राहु काल09:27 – 11:03
  • यमगंड14:13 – 15:49
  • गुलिक काल06:16 – 07:52

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:16 – 07:52
  • शुभ(शुभ)07:52 – 09:27
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:38
  • चर(सामान्य)12:38 – 14:13
  • लाभ(शुभ)14:13 – 15:49
  • अमृत(शुभ)15:49 – 17:24
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:24 – 19:00

रात

  • लाभ(शुभ)19:00 – 20:24
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:24 – 21:49
  • शुभ(शुभ)21:49 – 23:13
  • अमृत(शुभ)23:13 – 00:38 (18 अग॰)
  • चर(सामान्य)00:38 (18 अग॰) – 02:03 (18 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:03 (18 अग॰) – 03:27 (18 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (18 अग॰) – 04:52 (18 अग॰)
  • लाभ(शुभ)04:52 (18 अग॰) – 06:17 (18 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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