पंचांग 27 जून 2024
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
27 जून 2024 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:00
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय23:47
चंद्रास्त11:03
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
- संवत्सर:
- क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- कुंभ 04:31 (28 जून) तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण षष्ठी 18:39 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 16:27 (28 जून) तक
- नक्षत्र
- शतभिषा 11:36 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 10:10 (28 जून) तक
- योग
- आयुष्मान 00:27 (28 जून) तक, फिर सौभाग्य 21:38 (28 जून) तक
- करण
- गर 07:47 तक, फिर वणिज 18:39 तक, फिर विष्टि 05:33 (28 जून) तक, फिर बव 16:27 (28 जून) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:04
- राहु काल14:16 – 15:56
- यमगंड06:00 – 07:39
- गुलिक काल09:19 – 10:58
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:00 – 07:39
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:39 – 09:19
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:19 – 10:58
- चर(सामान्य)10:58 – 12:37
- लाभ(शुभ)12:37 – 14:16
- अमृत(शुभ)14:16 – 15:56
- काल(वर्जित (परंपरा))15:56 – 17:35
- शुभ(शुभ)17:35 – 19:14
रात
- अमृत(शुभ)19:14 – 20:35
- चर(सामान्य)20:35 – 21:56
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:56 – 23:17
- काल(वर्जित (परंपरा))23:17 – 00:37 (28 जून)
- लाभ(शुभ)00:37 (28 जून) – 01:58 (28 जून)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:58 (28 जून) – 03:19 (28 जून)
- शुभ(शुभ)03:19 (28 जून) – 04:40 (28 जून)
- अमृत(शुभ)04:40 (28 जून) – 06:00 (28 जून)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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