पंचांग 15 अप्रैल 2024
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
15 अप्रैल 2024 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:51
चंद्रोदय11:47
चंद्रास्त01:33 (16 अप्रैल)
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
- संवत्सर:
- क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मिथुन 20:38 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- शुक्ल सप्तमी 12:12 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 13:24 (16 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 03:05 (16 अप्रैल) तक, फिर पुष्य 05:16 (17 अप्रैल) तक
- योग
- सुकर्मा 23:08 तक, फिर धृति 23:16 (16 अप्रैल) तक
- करण
- वणिज 12:12 तक, फिर विष्टि 00:43 (16 अप्रैल) तक, फिर बव 13:24 (16 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59
- राहु काल07:51 – 09:26
- यमगंड11:00 – 12:34
- गुलिक काल14:08 – 15:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:17 – 07:51
- काल(वर्जित (परंपरा))07:51 – 09:26
- शुभ(शुभ)09:26 – 11:00
- रोग(वर्जित (परंपरा))11:00 – 12:34
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:34 – 14:08
- चर(सामान्य)14:08 – 15:43
- लाभ(शुभ)15:43 – 17:17
- अमृत(शुभ)17:17 – 18:51
रात
- चर(सामान्य)18:51 – 20:17
- रोग(वर्जित (परंपरा))20:17 – 21:42
- काल(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:08
- लाभ(शुभ)23:08 – 00:34 (16 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:34 (16 अप्रैल) – 01:59 (16 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)01:59 (16 अप्रैल) – 03:25 (16 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)03:25 (16 अप्रैल) – 04:51 (16 अप्रैल)
- चर(सामान्य)04:51 (16 अप्रैल) – 06:16 (16 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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