पंचांग 3 अक्टूबर 2023
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 अक्टूबर 2023 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:21
चंद्रोदय21:25
चंद्रास्त10:07
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1945 · विक्रम (चैत्रादि) 2080
- संवत्सर:
- शोभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण पंचमी 05:33 (4 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण षष्ठी 05:41 (5 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका 18:03 तक, फिर रोहिणी 18:29 (4 अक्टू॰) तक
- योग
- वज्र 08:17 तक, फिर सिद्धि 06:42 (4 अक्टू॰) तक
- करण
- कौलव 17:47 तक, फिर तैतिल 05:33 (4 अक्टू॰) तक, फिर गर 17:31 (4 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:47
- राहु काल15:22 – 16:52
- यमगंड09:24 – 10:54
- गुलिक काल12:23 – 13:53
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:54
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:24
- चर(सामान्य)09:24 – 10:54
- लाभ(शुभ)10:54 – 12:23
- अमृत(शुभ)12:23 – 13:53
- काल(वर्जित (परंपरा))13:53 – 15:22
- शुभ(शुभ)15:22 – 16:52
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:52 – 18:21
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:21 – 19:52
- लाभ(शुभ)19:52 – 21:22
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:22 – 22:53
- शुभ(शुभ)22:53 – 00:23 (4 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)00:23 (4 अक्टू॰) – 01:54 (4 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)01:54 (4 अक्टू॰) – 03:24 (4 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (4 अक्टू॰) – 04:55 (4 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:55 (4 अक्टू॰) – 06:25 (4 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें