पंचांग 22 मार्च 2023

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 मार्च 2023 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:37
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय07:03
चंद्रास्त19:30
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1945 · विक्रम (चैत्रादि) 2080
संवत्सर:
शोभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 20:21 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 18:21 (23 मार्च) तक
नक्षत्र
उत्तरभाद्रपदा 15:32 तक, फिर रेवती 14:08 (23 मार्च) तक
योग
शुक्ल 09:16 तक, फिर ब्रह्म 06:15 (23 मार्च) तक, फिर इन्द्र 03:42 (24 मार्च) तक
करण
किंस्तुघ्न 09:33 तक, फिर बव 20:21 तक, फिर बालव 07:16 (23 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:17 – 13:05परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:41 – 14:12
  • यमगंड08:08 – 09:39
  • गुलिक काल11:10 – 12:41

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:37 – 08:08
  • अमृत(शुभ)08:08 – 09:39
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:39 – 11:10
  • शुभ(शुभ)11:10 – 12:41
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:41 – 14:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:43
  • चर(सामान्य)15:43 – 17:14
  • लाभ(शुभ)17:14 – 18:45

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:45 – 20:14
  • शुभ(शुभ)20:14 – 21:43
  • अमृत(शुभ)21:43 – 23:12
  • चर(सामान्य)23:12 – 00:41 (23 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:41 (23 मार्च) – 02:10 (23 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:10 (23 मार्च) – 03:38 (23 मार्च)
  • लाभ(शुभ)03:38 (23 मार्च) – 05:07 (23 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:07 (23 मार्च) – 06:36 (23 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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